गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009

कैसे पहुँचता है साईलीला टाईम्स पाठको के हाथो तक?

ॐ साईं राम, आप सबको लगता होगा की अखबार के प्रकाशन में बहुत फायदा है और ये काम किसी भी दूसरे काम से आसान है. चलिए आज इसी बात पर चर्चा कर लेते हैं. किसी भी अखबार का प्रकाशन दो मुख्य बातों पर निर्भर करता है छापने के लिए सामग्री और खर्चा निकालने के लिए विज्ञापन. जो भी अखबार इन दो मुख्य द्वारो से भली प्रकार गुज़र जाता है वही सक्षम होता है अपने पाठको के बनाय नियमो पर खरा उतरने में. पाठक, किसी भी अखबार का ध्येय या कहें मंजिल होते हैं. साईलीला टाईम्स के प्रकाशन को आठ साल हो चुके हैं और अखबार के रूप में साईं समाचारों को साईं भक्तो के सामने प्रस्तुत करने में साईलीला टाईम्स ने कभी भी कोताही नहीं बरती है. साईलीला टाईम्स के सामने भी लगभग सभी प्रकार की तकलीफे और मुश्किलें आई हैं मगर साईलीला टाईम्स साईं की लीला का साक्षात् प्रमाण है. साईं ने जहाँ प्रकाशकों को विभिन्न मंचो पर सम्मान दिलाया है वहीँ अनेको बार साईलीला टाईम्स को अपने पाठको की बेरुखी और नाराज़गी का भी सामना करना पड़ा है. साईलीला टाईम्स की तमाम मुश्किलों को शिर्डी में स्वर्ण सिंहासन पर विराजित दया की मूर्ती अखंड भक्तवत्सल अनंतकोटी ब्रह्माण्ड नायक राजाधिराज योगिराज परब्रह्म श्रीसच्चिदानंद समर्थ सतगुरु साईनाथ महाराज ने कदम-कदम पर दूर किया है. प्रेमावातार साईं के चरणों का ये अनुराग है की साईलीला टाईम्स दिन प्रतिदिन अपने पाठको को साईं समाज में हो रही विभिन्न अच्छी बुरी घटनाओं से अवगत कराता है. पाठको के हाथ में पहुँचने तक साईलीला टाईम्स विभिन्न सोपानों को पार करता है. आइये उसी की चर्चा करें और जाने की एक अखबार अपने पाठको तक कैसे पहुँचता है.1. अखबार में प्रकाशित होने वाले पेजों की संख्या का निर्धारण.2. छपाई के लिए निर्धारित खर्च को विज्ञापन और अखबार की प्रति के मूल्य से निकालना3. छापने योग्य सामग्री का चयन और ना छापी जा सकने वाली रचनाओं का संरक्षण4. छपने योग्य सामग्री का टंकण और अखबार का डिजाईन तैयार करना5. विज्ञापन देने वाले सहयोगियों से धनराशि प्राप्त करना और एक बार फिर गड़ना

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